भारत की आवाज • सच के साथ
Updated: 25 July 2026 | Hindi News Portal
मुद्दा
आज का मुद्दा
नजर आपकी खबर आपकी
ब्रेकिंग
सुनहरी बाग में महिला कांग्रेस का हल्ला बोल: 33% आरक्षण, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना बुलंदशहर में सड़क हादसों पर लगाम के लिए पुलिस की बैठक, कावड़ यात्रा को लेकर दिए निर्देश हेपेटाइटिस से जुड़े मिथकों को तोड़ें, समय रहते कराएं जांच : डॉ संजय कुमार नोएडा में अवैध रूप से संग्रहित लगभग 79 लाख 94 हजार रुपये मूल्य की औषधियां जब्त बुलंदशहर में 136 जोड़ों का सामूहिक विवाह, विधायक लक्ष्मी राज सिंह ने नवदंपतियों को दिया सुखी जीवन का आशीर्वाद महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भारती त्यागी को लखनऊ जाने से रोका, प्रशासन ने किया हाउस अरेस्ट अनशन : भूख का नहीं, लोकतंत्र की अंतरात्मा का आह्वान आखिरी फिल्म के लिए विजय ने वसूली मोटी फीस; बने सबसे महंगे एक्टर नोएडा में अवैध रूप से संग्रहित लगभग 2.48 करोड़ रुपये मूल्य की औषधियां जब्त, एक व्यक्ति गिरफ्तार कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिल्ली जाने से रोका राहुल गांधी के समर्थन में जाने की थी तैयारी, रात 12 बजे पुलिस पहुंची
Advertisement Space 970x250
Lifestyle

₹100 की थाली आपके घर तक ₹300 में कैसे पहुंचती है? फूड डिलीवरी कंपनी के सीईओ ने खुद खोल दी कमीशन की पोल

पिछले कुछ समय में ऑनलाइन फूड का कारोबार भारत में काफी तेजी से फैला है। होम डिलीवरी के नाम पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां 100 रुपये की खाने केलिए 300 से 400 रुपये तक का चार्ज कर रही हैं।

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 07 Jul 2026, 06:05 PM | Views: 0
₹100 की थाली आपके घर तक ₹300 में कैसे पहुंचती है? फूड डिलीवरी कंपनी के सीईओ ने खुद खोल दी कमीशन की पोल

पिछले कुछ समय में ऑनलाइन फूड का कारोबार भारत में काफीतेजी से फैला है। होम डिलीवरी के नाम पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां 100 रुपये की खाने केलिए 300 से 400 रुपये तक का चार्ज कर रही हैं। समय की कमी या घर में बैठे खाना पाने की चाहतमें लोग बिना किसी सवाल के धड़ेल्ले से फूड की ऑनलाइन ऑर्डर कर रहे हैं।हालांकि, यह सवाल काफी समय से उठ रहा है कि कि 80 रुपये के खाने के लिए 300 रुपये तक काचार्ज क्यों वसूला जा रहा है। इन्हीं सवालों के बीच रैपिडो के सीईओ ने ऑनलाइन फूड कंपनियों कीकमीशन के खेल का पोल खोल दिया है।

‘जोमैटो और स्विगी बड़े ब्रांड्स तक सीमित’
रैपिडो के सीईओ अरविंद सांका का कहना है कि तीन साल में ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाले लोगों कीसंख्या 10 करोड़ तक नहीं पहुंचती, तो कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस ‘ओनली’ होने का कोई मतलबनहीं रह जाता। उनके मुताबिक, जोमैटो और स्विगी ने मार्केट में सिर्फ बड़े नेशनल ब्रांड्स तक सीमित
रखा, जबकि लोकल रेस्टोरेट इस मॉडल से पीछे छूट गए। इससे मार्केट का विस्तार में रुकावट आ गई।

100 रुपये के खाने का चार्ज 300 रुपये क्यों?
एक इंटरव्यू के दौरान अरविंद सांका ने कहा कि रेस्टोरेंट में जो खाना 80 से 120 रुपये में मिलता है,वही ऑर्डर कमीश्न मार्कअप, डिलीवरी चार्ज के बाद 250 रुपये से 300 रुपये तक का हो जाता है। सांकाका दावा है कि यही महंगी चार्ज कई छोटे और स्थानीय रेस्टोरेंट को डिलीवरी प्लेटफॉर्म से दूर कर देती
है, क्योंकि वे इस तरह के महंगे और अतिरिक्त चार्च से खुद को बचाना चाहते हैं।

रैपिडो की एंट्री से ऑनलाइन ऑर्डर होगा सस्ता
सांका के मुताबिक, रैपिडो का दांव जीरो-कमीश्न मॉडल है, जिसमें रेस्टोरेंट मेन्यू की कीमत वही रखेंगेजो दुकान पर है और मुनाफा कमीश्न बढ़ाने के बजाय लॉजिस्टिक्स में सुधार से कमाया जाएगा। कंपनीके 30 लाख से अधिक एक्टिव राइडर हर रोज 75 लाख रुपये से ज्यादा बाइक-टैक्सी, ऑटो और कैबऑर्डर को संभालते हैं। यही नेटवर्क फूड डिलीवरी को और भी सस्ता बनाने का काम करेगा।

हर रोज होने वाले ऑनलाइन ऑर्डर के आंकड़े
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर रोज 50 से 60 लाख के बीच ऑइनलाइन फूड ऑर्डर दिए जाते हैं,जिसकी कुल वैल्यू लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये के आसपास रहता है। देश के भीतर ऑनलाइन फूडडिलीवरी मार्केट में जोमैटो और स्वीगी का वर्चस्व है, जो टोटल ऑर्डर का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। वहीं,
अगर सालाना आंकड़ों की बात करें तो भारत में यह 76,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

आज का मुद्दा Hindi News Breaking News Lifestyle

Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

आज का मुद्दा जनता से जुड़े मुद्दों, स्थानीय खबरों और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करता है।

संबंधित खबरें