- वीरेश तिवारी
नोएडा पिछले लगभग तीस वर्षों से मुझे सेक्टर-15ए, नोएडा के स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब से जुड़ने का अवसर मिला है। सुबह-शाम जिम, स्विमिंग और विभिन्न खेल गतिविधियों में नियमित रूप से भाग लेते हुए मैंने इस क्लब को बहुत करीब से देखा है। मेरे लिए यह केवल एक क्लब नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन, आत्मीयता और सामाजिक जीवन का एक उत्कृष्ट केंद्र है। यहाँ बिताया गया समय मुझे हमेशा आनंद और सकारात्मक ऊर्जा देता है।इन तीस वर्षों में मैंने क्लब के अनेक दौर देखे हैं। मेरा अनुभव कहता है कि किसी भी संस्था की पहचान केवल उसकी इमारतों या सुविधाओं से नहीं, बल्कि उसके नेतृत्व, कार्य संस्कृति और टीम भावना से बनती है।
वर्तमान में जनरल सेक्रेटरी श्री संजीव सरीन के नेतृत्व में क्लब में जो अनुशासन, स्वच्छता, सक्रियता और जवाबदेही दिखाई दे रही है, वह वास्तव में प्रशंसनीय है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं है। केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों में औपचारिक अभिवादन हुआ है। यह लेख केवल एक सदस्य के रूप में मेरे तीन दशक के अनुभव पर आधारित है।मेरे अनुभव में श्री सरीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वही स्टाफ, वही संसाधन और वही व्यवस्था होते हुए भी कार्य करने की संस्कृति पूरी तरह बदल गई है। इससे सिद्ध होता है कि किसी भी संस्था की सफलता का सबसे बड़ा आधार प्रभावी नेतृत्व और सक्षम प्रबंधन होता है।
इस बार की सबसे उल्लेखनीय बात महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। समिति में शामिल नई महिला सदस्य जिस समर्पण, अनुशासन और ऊर्जा के साथ कार्य कर रही हैं, वह पूरे क्लब और सेक्टर में स्पष्ट दिखाई देता है। कार्यक्रमों की तैयारी हो, व्यवस्थाओं की निगरानी हो या सदस्यों की सुविधा—हर जगह उनकी सकारात्मक भूमिका नजर आती है।सरकारें वर्षों से महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की बात करती रही हैं, लेकिन मेरे अनुभव में श्री संजीव सरीन ने व्यवहार में महिलाओं को उससे भी अधिक अवसर और जिम्मेदारियाँ देकर एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। परिणाम आज सभी सदस्यों के सामने है। इससे यह संदेश मिलता है कि जब महिलाओं को विश्वास और नेतृत्व में उचित स्थान मिलता है, तो संस्थाएँ अधिक अनुशासित, संवेदनशील और सफल बनती हैं।
मैं जानबूझकर किसी एक महिला सदस्य का नाम नहीं लिख रहा हूँ, क्योंकि पूरी टीम समान रूप से सम्मान और प्रशंसा की अधिकारी है। सभी ने मिलकर क्लब की कार्यसंस्कृति को नई ऊँचाई देने में योगदान दिया है।खेल गतिविधियों में भी नई ऊर्जा दिखाई देती है। श्री सचिन खरबंदा नियमित रूप से खिलाड़ियों के बीच उपस्थित रहते हैं, उनकी समस्याएँ सुनते हैं और व्यवस्थाओं पर निरंतर ध्यान देते हैं। किसी भी खेल संस्था की सफलता के लिए यही सक्रियता आवश्यक होती है।इस अवसर पर क्लब के संस्थापक मार्गदर्शकों को भी नमन करना आवश्यक है। स्वर्गीय श्री पी. के. कौल तथा श्री बागला जैसे वरिष्ठ प्रशासकों ने जिस दूरदृष्टि से इस संस्था की मजबूत नींव रखी, उसी का परिणाम है कि आज यह क्लब अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। वर्तमान नेतृत्व उसी मजबूत आधार को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा है।
इसी प्रकार सेक्टर-15ए के वर्तमान अध्यक्ष श्री देवदत्त के नेतृत्व में भी स्वच्छता, हरियाली और अनुशासन का वातावरण स्पष्ट दिखाई देता है। बड़े प्रशासनिक पद पर कार्य करने के बाद भी जिस समर्पण से वे स्थानीय समाज के लिए समय दे रहे हैं, वह सराहनीय है।मेरे विचार से एनसीआर के क्लबों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों को यहाँ आकर इस कार्यशैली का अध्ययन करना चाहिए। सफल संस्थाएँ केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि ईमानदार नेतृत्व, अनुशासित टीम और सेवा भावना से बनती हैं।मुझे एक पंक्ति बार-बार याद आती है—"जहाँ नेतृत्व नीयत से चलता है, वहाँ व्यवस्था अपने आप उत्कृष्ट बन जाती है; और जहाँ महिलाओं को सम्मान और जिम्मेदारी मिलती है, वहाँ सफलता स्वयं कदम चूमती है।"मेरा विश्वास है कि यदि समाज, संस्थाओं और राजनीति में महिलाओं की सार्थक भागीदारी इसी प्रकार बढ़े और नेतृत्व सेवा की भावना से कार्य करे, तो देश की अनेक व्यवस्थाएँ और अधिक प्रभावी बन सकती हैं।
यही कारण है कि मैं सेक्टर-15ए स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब और उसके वर्तमान नेतृत्व को एनसीआर के लिए एक प्रेरक उदाहरण मानता हूँ।
— वीरेश तिवारी — जनतंत्र एवं स्तंभकार
चेयरमैन, चंद्रावती ग्रुप
सदस्य, ट्रिब्यूनल नोएडा अथॉरिटी