सोशल प्रोग्रेस एसोसिएशन द्वारा सेक्टर-11 के के-ब्लॉक पार्क में आयोजित "संगीत योग संध्या" अपने आप में एक अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन रहा। शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक निरंतर चले इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एक परिवार की तरह जुड़ता है, तो साधारण आयोजन भी असाधारण बन जाते हैं।इस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां डेढ़ वर्ष के बच्चे से लेकर 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक तक सक्रिय सदस्य हैं। आज के समय में जहां पीढ़ियों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है, वहीं यह संगठन विभिन्न आयु वर्गों को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रहा है।
संगठन का प्रत्येक कार्यक्रम आत्मनिर्भरता और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण होता है। यहां किसी भी आयोजन के लिए बाहरी लोगों को नियुक्त नहीं किया जाता। कार्यक्रम की योजना बनाने से लेकर उसके सफल संचालन और समापन तक की पूरी जिम्मेदारी संस्था के सदस्य स्वयं निभाते हैं। यहां कोई "विशेष" नहीं होता, सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं। कोई आदेश नहीं देता, बल्कि सदस्य स्वयं आगे बढ़कर कहते हैं—"मैं यह जिम्मेदारी निभाऊंगा, मैं यह कार्य कर लूंगी, और बताइए क्या करना है?"
ऐसे दृश्य देखकर भारतीय संस्कृति की वह सुंदर परंपरा याद आती है जिसमें परिवार और समाज एक-दूसरे का सहारा हुआ करते थे। विशेष रूप से उन बच्चों के लिए यह संस्था एक प्रेरणा है, जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के सान्निध्य से वंचित रह जाते हैं। यहां आकर महसूस होता है कि युवा अपने वरिष्ठों का कितना सम्मान करते हैं। वे चाहते हैं कि उनके वरिष्ठ आराम से बैठें, भोजन करें और आनंद लें, जबकि वरिष्ठों की आंखों में युवाओं के लिए अपार स्नेह और आशीर्वाद झलकता है। सोशल प्रोग्रेस एसोसिएशन का प्रत्येक कार्यक्रम अनूठा होता है। आज जब लोग अपने घरों को ही अपनी दुनिया मानकर सीमित होते जा रहे हैं और पड़ोसियों तक से दूरी बढ़ती जा रही है, तब यह संस्था लोगों को साथ आने, मिलने-जुलने और सामूहिक आनंद लेने का अवसर प्रदान करती है। सदस्य अपने घर से भोजन या नाश्ता लेकर आते हैं, भजन, गीत, संगीत और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हैं तथा एक परिवार की तरह समय बिताते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संस्था किसी पर सदस्य बनने का दबाव नहीं डालती। न किसी को जबरदस्ती किसी समूह में जोड़ा जाता है और न ही प्रचार के लिए अनावश्यक प्रयास किए जाते हैं। जो भी व्यक्ति संगठन के कार्यों को देखता है, वह स्वयं इससे जुड़ने के लिए प्रेरित हो जाता है।संगीत योग संध्या भी इसी भावना का सुंदर उदाहरण रही। श्रीमती लक्ष्मी जी के नेतृत्व में तथा कविता राठौर द्वारा चयनित मधुर संगीत पर पूरे आत्मविश्वास के साथ लगभग एक घंटे तक संगीत योग का कार्यक्रम चला। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डॉ.नीरजा उपाध्याय, सुषमा नेब, प्रीति शर्मा, सुमन गर्ग, संगीता सचदेवा, सुनेत्रा रॉय, कार्तिकेय तथा सुनील शर्मा सहित अनेक सदस्यों ने मिलकर पहले से ही विचार-विमर्श किया कि इस एक घंटे की साधना के दौरान प्रतिभागियों के लिए क्या व्यवस्था की जाए।
गर्मी का मौसम होने के कारण विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखा गया। ऐसे में सरदार मंजीत सिंह जी और अमर सचदेवा जी ने ठंडे एवं मीठे जल की सेवा का दायित्व संभाला। योगाभ्यास के दौरान भी प्रतिभागियों को समय-समय पर ठंडा जल उपलब्ध कराया जाता रहा, ताकि उनकी ऊर्जा बनी रहे और वे पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम का आनंद ले सकें। अन्य बहनों ने पूरे उत्साह के साथ जलपान और आवश्यक व्यवस्थाओं को संभाला, जबकि संस्था से जुड़े पुरुष सदस्यों ने वितरण और व्यवस्था में पूर्ण सहयोग दिया। आवश्यक सामग्री सदस्यों के घरों से आई, सभी ने मिलकर जलपान साझा किया और पूरे आयोजन का आनंद लिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि खुशियां खर्च से नहीं, बल्कि सहभागिता और अपनत्व से पैदा होती हैं।
योग शरीर को स्वस्थ बनाता है, जबकि संगीत मन और बुद्धि को संतुलित करता है। दोनों का यह सुंदर संगम तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। जब इसके साथ अपनों का साथ और सामूहिक आनंद जुड़ जाए, तो जीवन में अकेलेपन की भावना भी स्वतः समाप्त होने लगती है।कार्यक्रम शुरू होने से पहले सदस्यों ने पूरे पार्क को व्यवस्थित किया और समापन के बाद स्थल को पुनः साफ-सुथरा करके छोड़ा। यह सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
कार्यक्रम के समापन पर संस्था की अध्यक्ष अंजना भागी ने कहा—
"एक सुंदर और सकारात्मक परिवार का निर्माण करना कठिन लगता है, लेकिन हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि लोग स्वयं इस परिवार का हिस्सा बनने के लिए आगे आ रहे हैं। आप सभी के सहयोग, समर्पण और प्रेम के कारण यह परिवार निरंतर बढ़ रहा है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है।" यदि समाज साथ चलने का संकल्प ले, तो हर मोहल्ला, हर पार्क और हर परिवार खुशियों का केंद्र बन सकता है।